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अंबेडकर जयंती पर बाबा साहेब के सुविचार

हर साल 14 अप्रैल का दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए आत्मसम्मान और समानता के संकल्प का पर्व है। डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर, जिन्हें हम प्यार से ‘बाबासाहेब’ कहते हैं, एक ऐसे युगपुरुष थे जिन्होंने न केवल आधुनिक भारत की नींव रखी, बल्कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी ‘मनुष्य’ होने का गौरव दिलाया।

भारतीय संविधान के शिल्पकार: डॉ. बी.आर. अंबेडकर और उनका कालजयी योगदान

हर साल 14 अप्रैल का दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए आत्मसम्मान और समानता के संकल्प का पर्व है। डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर, जिन्हें हम प्यार से ‘बाबासाहेब’ कहते हैं, एक ऐसे युगपुरुष थे जिन्होंने न केवल आधुनिक भारत की नींव रखी, बल्कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी ‘मनुष्य’ होने का गौरव दिलाया।

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संघर्षों से तपकर निखरा व्यक्तित्व (जीवन अनुभव)

बाबासाहेब का जन्म मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने छुआछूत और जातिगत भेदभाव का वह कड़वा सच झेला, जो किसी भी साधारण इंसान को तोड़ सकता था। स्कूल में प्यास लगने पर उन्हें पानी का घड़ा छूने तक की अनुमति नहीं थी।

बाबासाहेब अक्सर याद करते थे कि स्कूल में उन्हें फर्श पर टाट बिछाकर बैठना पड़ता था और उस टाट को भी उन्हें खुद ही धोना पड़ता था, ताकि कोई और उसे छूकर ‘अपवित्र’ न हो जाए।

इन अपमानों ने उन्हें कमजोर नहीं बनाया, बल्कि उनके भीतर न्याय की मशाल जला दी। कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसी विश्वप्रसिद्ध संस्थाओं से उच्च शिक्षा प्राप्त कर वे आधुनिक भारत के सबसे शिक्षित व्यक्तित्वों में से एक बने।

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बाबासाहेब के अनमोल विचार (Famous Quotes)

  1. “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।”
  2. “मैं किसी समुदाय की प्रगति को उस डिग्री से मापता हूँ जो महिलाओं ने हासिल की है।”
  3. “बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।”
  4. “छीने हुए अधिकार भीख में नहीं मिलते, अधिकार वसूल करने पड़ते हैं।”
  5. “संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का एक माध्यम है।”
  6. “यदि मुझे लगा कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो मैं इसे सबसे पहले जलाऊंगा।”
  7. “धर्म मनुष्य के लिए है, न कि मनुष्य धर्म के लिए।”
  8. “स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाने वाले धर्म को मैं पसंद करता हूँ।”
  9. “एक महान व्यक्ति एक प्रतिष्ठित व्यक्ति से इस तरह भिन्न होता है कि वह समाज का सेवक बनने के लिए तैयार रहता है।”
  10. “जीवन लम्बा होने के बजाय महान होना चाहिए।”

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    अंबेडकर जयंती हमें याद दिलाती है कि समाज तब तक सशक्त नहीं हो सकता जब तक उसके हर सदस्य को न्याय न मिले। बाबासाहेब ने अपना पूरा जीवन ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ के लिए समर्पित कर दिया।

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