भारत इस समय भीषण गर्मी और लू (Heatwave) की चपेट में है। वैश्विक तापमान आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 92 अकेले भारत के हैं। अप्रैल के शुरुआती दौर में ही दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर गया है। मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी करते हुए नागरिकों को दोपहर के समय बाहर न निकलने की सलाह दी है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से 5-6 डिग्री अधिक दर्ज किया गया है।
बिजली की मांग रोज बढ़ रही
भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है, जिससे कई राज्यों में बिजली कटौती (Grid Pressure) की समस्या पैदा हो रही है। कृषि क्षेत्र पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है; गेहूं की कटाई के समय बढ़ते तापमान से उत्पादन कम होने की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामलों में पिछले साल के मुकाबले 30% की वृद्धि देखी गई है।
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पर्यावरणविदों ने सरकार की शहरी नियोजन नीति की कड़ी आलोचना की है। उनका तर्क है कि शहरों में ‘कंक्रीट के जंगल’ और कम होते हरित क्षेत्र (Green Cover) इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक वादे तो कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर शहरों को ‘हीट आइलैंड’ बनने से रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने मांग की है कि गर्मी को अब ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित कर इसके लिए अलग से बजट और कार्ययोजना (Heat Action Plan) तैयार की जानी चाहिए।
















