देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सबसे सम्मानित वरिष्ठ नेताओं में से एक, मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूड़ी का आज, 19 मई 2026 को देहरादून के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। वे 91 वर्ष के थे और लंबे समय से बढ़ती उम्र की जटिलताओं व गंभीर अस्वस्थता के चलते अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि होते ही संपूर्ण उत्तराखंड और देश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा करते हुए अपने सभी आधिकारिक कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं।
1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे बी.सी. खंडूड़ी का व्यक्तित्व ‘सैनिक से राजनेता’ तक के एक अनुकरणीय सफर की कहानी है। उन्होंने 1954 से 1990 तक भारतीय सेना की ‘कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स’ में अपनी सेवाएं दीं और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी सक्रिय भूमिका निभाई। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद वे सक्रिय राजनीति में आए और चार बार गढ़वाल लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री के रूप में उनके द्वारा शुरू की गई ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ योजना ने देश की कनेक्टिविटी की तस्वीर बदल दी। बाद में उन्होंने दो बार (2007-2009 और 2011-2012) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश का नेतृत्व किया।
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‘मिस्टर क्लीन’ के नाम से विख्यात खंडूड़ी जी को प्रशासनिक शुचिता और कड़े लोकायुक्त कानून को लागू करने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका कड़ा सैन्य अनुशासन और नियमों से कभी समझौता न करने की शैली दलीय राजनीति के आंतरिक दांव-पेंचों में अक्सर टकराव का कारण बनी। इसी दलीय असंतोष के चलते उन्हें दोनों बार अपना मुख्यमंत्री का कार्यकाल बीच में ही छोड़ना पड़ा था। इसके बावजूद, उनके विरोधी भी उनकी बेदाग ईमानदारी और सादगीपूर्ण जीवन के प्रति हमेशा नतमस्तक रहे।
















