देहरादून/मसूरी: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के पूर्ण रूप से संचालित होने के बाद उत्तराखंड के पर्यटन परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दिल्ली से देहरादून की दूरी मात्र 2.5 घंटे होने के कारण अब न केवल वीकेंड बल्कि सप्ताह के बीच में भी पर्यटकों की संख्या में भारी उछाल आया है। मसूरी और नैनीताल के प्रमुख होटलों में 90% से अधिक ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई है। विशेष रूप से राजजी नेशनल पार्क से गुजरने वाला 12 किमी लंबा एशिया का सबसे बड़ा ‘वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर’ पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहाँ लोग वन्यजीवों के दीदार के लिए पहुँच रहे हैं।
परिवहन विभाग के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे के जरिए प्रतिदिन हजारों वाहन उत्तराखंड में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे राज्य के राजस्व में भी वृद्धि हो रही है। पर्यटकों की इस भीड़ को देखते हुए मसूरी प्रशासन ने ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए नई योजना लागू की है, जिसके तहत मुख्य माल रोड पर वाहनों के प्रवेश को समयबद्ध किया गया है। स्थानीय होटल एसोसिएशन और पर्यटन व्यापारियों ने इस बढ़ती आवाजाही को अर्थव्यवस्था के लिए सुखद संकेत बताया है।
पौड़ी के जंगलों की आग ने बढ़ाई आंख और सांस की बीमारियां
जहाँ पर्यटकों की संख्या बढ़ने से व्यापार चमक रहा है, वहीं सुदूरवर्ती पहाड़ी कस्बों का बुनियादी ढांचा इस ‘अचानक आए बोझ’ के नीचे कराह रहा है। मसूरी और नैनीताल में पार्किंग की समस्या विकराल हो गई है, जिससे पर्यटकों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अत्यधिक वाहनों के कारण ध्वनि और वायु प्रदूषण में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को केवल एक्सप्रेसवे बनाने पर ही नहीं, बल्कि पर्यटन स्थलों के भीतर ‘कैरीइंग कैपेसिटी’ और वैकल्पिक पार्किंग समाधानों पर भी ध्यान देना होगा।
















