भारतीय कॉर्पोरेट जगत और शेयर बाजार के लिए आज सुबह एक बेहद बड़ी खबर सामने आई। अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) ने उद्योगपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ न्यूयॉर्क की अदालत में चल रहे सभी आपराधिक और प्रतिभूति धोखाधड़ी (Securities and Wire Fraud) के आरोपों को स्थायी रूप से वापस ले लिया है। अमेरिकी अभियोजकों ने अपनी अंतिम समीक्षा में निष्कर्ष निकाला कि वे इन आरोपों को अदालत में बनाए रखने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं पा रहे हैं। इस फैसले के साथ ही अडानी समूह के खिलाफ चल रहीं तमाम अमेरिकी नियामक और कानूनी जांचें भी पूरी तरह से बंद हो गई हैं।
इस क्लीन चिट की खबर आते ही भारतीय शेयर बाजारों में अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त लिवाली देखी गई। समूह के प्रमुख मीडिया निवेश ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के शेयर शुरुआती कारोबार में ही 7% से अधिक उछल गए, जबकि समूह की अन्य फ्लैगशिप कंपनियों में भी भारी तेजी दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर आरोपों के खारिज होने से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का भरोसा समूह में दोबारा लौटेगा, जिससे पिछले कुछ समय से जारी अनिश्चितता का अंत होगा।
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जहां कॉर्पोरेट विशेषज्ञ इसे भारतीय उद्योग जगत की एक बड़ी कानूनी जीत के रूप में देख रहे हैं, वहीं घरेलू स्तर पर इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों का तर्क है कि जब विदेशी एजेंसियां इतनी तत्परता से जांच पूरी कर अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच सकती हैं, तो भारतीय नियामक संस्थाओं (जैसे SEBI) की जांच प्रक्रियाएं इतनी धीमी क्यों रहीं? आलोचकों का मानना है कि इस तरह के वैश्विक घटनाक्रम भारतीय वित्तीय प्रणाली की निगरानी क्षमता पर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि, समर्थकों का कहना है कि अमेरिकी अदालत का यह फैसला साबित करता है कि समूह के खिलाफ लगाए गए आरोप बुनियादी रूप से कमजोर और पूर्वाग्रह से प्रेरित थे।

