न्यूज डेस्क: पश्चिम एशिया, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण अपील की है। हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अगले एक साल तक सोने की खरीद से बचें और ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की खपत को कम करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता है, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
सरकार ने कॉर्पोरेट जगत से भी अपील की है कि जहाँ संभव हो, ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) मॉडल को दोबारा अपनाया जाए ताकि सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम हो और ईंधन की बचत हो सके। इसके अतिरिक्त, किसानों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग 50% तक कम करने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया गया है। सरकार का लक्ष्य आयात बिल को कम कर रुपये की स्थिरता बनाए रखना है।
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आर्थिक विशेषज्ञों ने इस अपील को “जरूरी लेकिन व्यावहारिक रूप से कठिन” बताया है। आलोचकों का तर्क है कि भारत में शादियों के सीजन के दौरान सोने की खरीद पर रोक लगाना सामाजिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि बुनियादी आर्थिक विफलता को छिपाने के लिए आम जनता पर बचत का बोझ डाला जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन बचत की अपील से परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई पर काबू पाना एक नई चुनौती बन जाएगा।
















