नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन हिंसक होने के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। कंपनी प्रबंधन द्वारा वेतन बढ़ाने की घोषणा के बावजूद, प्रदर्शनकारियों के एक गुट ने उपद्रव किया, जिसके बाद पुलिस ने 350 से अधिक कर्मचारियों को हिरासत में लिया है। नोएडा पुलिस के अनुसार, कुछ बाहरी तत्वों ने सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक सूचनाएं फैलाईं, जिससे शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने हिंसक मोड़ ले लिया। पुलिस ने कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में कई एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं।
नोएडा फेज-2 और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और धारा 144 लागू कर दी गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वेतन संबंधी विवादों को वार्ता के जरिए सुलझाया जाना चाहिए था और हिंसा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल औद्योगिक इकाइयों में काम फिर से शुरू हो गया है, लेकिन तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
श्रमिक संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई को “एकतरफा” और “दमनकारी” बताया है। उनका तर्क है कि कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से लंबित थीं और प्रबंधन ने केवल दबाव में आकर मामूली वृद्धि की है। आलोचकों का कहना है कि पुलिस द्वारा इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारी करने से श्रमिकों में डर का माहौल पैदा हो रहा है और यह उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि हिरासत में लिए गए निर्दोष कर्मचारियों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए और सोशल मीडिया की निगरानी के नाम पर अभिव्यक्ति की आजादी को नहीं दबाया जाना चाहिए।
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