UTTARAKHAND

खनन में 100 गुना बढ़ा राजस्व, अवैध खनन पर नहीं लगी लगाम

देहरादून।

राज्य स्थापना के बाद उत्तराखंड ने ढाई दशक में खनन क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। जहां 2000 के शुरुआती वर्षों में यह क्षेत्र सीमित पैमाने पर संचालित था, वहीं अब यह प्रदेश के गैर-कर राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है। साथ ही इसने पूरे उत्तराखंड में अपने पैर पसार लिए है। कहीं वैध तो कहीं अवैध तरीके से। शुरुआती वर्षों में खनन पट्टों की सीमित संख्या और कमजोर व्यवस्था के कारण राजस्व बेहद कम था, परंतु 2024–25 में यह आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है।

राज्य गठन के शुरुआती दशक (2000–2010) में खनन विभाग से आय कुछ करोड़ तक सीमित रही। उस दौर में नीति निर्माण, पर्यावरण स्वीकृतियों और वैधानिक ढांचे के अभाव में अधिकांश खनन क्रियाएं स्थानीय स्तर तक ही सीमित थीं। 2010 के बाद विभागीय ढांचे में सुधार और रॉयल्टी संग्रह की प्रक्रिया पारदर्शी होने से आय में बढ़ोतरी दर्ज की गई। साथ ही इसके क्षेत्र में भी विस्तार शुरू हो गया। नदियों का सीना चीर कर किये जा रहे अवैध खनन को लेकर जागरूक लोगों ने सरकार से लेकर हाईकोर्ट तक गुहार लगाई।

यह भी पढ़ें -  धामी सरकार में मंत्रियों को सौंपी महकमे की जिम्मेदारियां, CM धामी के पास हैं इतने विभाग

वित्तीय वर्ष 2024–25 में खनन विभाग को करीब ₹1,100 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। बीते कुछ वर्षों में विभाग ने ऑनलाइन निगरानी प्रणाली, GPS ट्रैकिंग और ई-रॉयल्टी जैसी व्यवस्थाएं लागू की हैं। इससे न केवल अवैध खनन पर कुछ हद तक नियंत्रण हुआ बल्कि राजस्व संग्रह में भी उल्लेखनीय सुधार आया।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में खनन से संबंधित नीतियां यदि इसी तरह रहीं, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र पर्यटन और ऊर्जा के बाद प्रदेश की तीसरी सबसे बड़ी आय श्रेणी बन सकता है।

Back to top button