देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) द्वारा मंगलवार को दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) के भव्य उद्घाटन के बाद, आज परिचालन के पहले दिन मार्ग पर भारी उत्साह देखा गया। ₹12,000 करोड़ की लागत से तैयार इस 213 किलोमीटर लंबे सिक्स-लेन एक्सप्रेसवे ने दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी को समय के लिहाज से आधा कर दिया है। पहले जहाँ इस सफर में 5 से 6 घंटे लगते थे, वहीं अब यात्री इसे मात्र 2.5 घंटे में पूरा कर रहे हैं। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर उत्तराखंड की आर्थिकी के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा, विशेषकर आगामी चारधाम यात्रा के दौरान।
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इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता राजाजी नेशनल पार्क के इको-सेंसिटिव जोन में बना 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है। यह कॉरिडोर न केवल वाहनों की निर्बाध गति सुनिश्चित करता है, बल्कि नीचे हाथियों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्तों को भी सुरक्षित रखता है। आज पहले दिन कई यात्रियों ने इस ऊंचे मार्ग से यात्रा के अनुभव को ‘विश्व स्तरीय’ बताया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड को “दशक का सर्वश्रेष्ठ राज्य” बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
जहाँ एक ओर विकास की सराहना हो रही है, वहीं स्थानीय टैक्सी संचालकों और ढाबा मालिकों ने चिंता जताई है। एक्सप्रेसवे के ‘एक्सेस-कंट्रोल्ड’ होने के कारण पुराने रूट पर स्थित छोटे कस्बों के स्थानीय व्यवसायों पर असर पड़ने की संभावना है। साथ ही, पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि एक्सप्रेसवे पर वाहनों की बढ़ती गति और शोर वन्यजीवों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है, जिसके लिए ध्वनि अवरोधकों (Sound Barriers) की प्रभावशीलता की निरंतर निगरानी आवश्यक है।
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