बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। भाजपा नेता सम्राट चौधरी आज सुबह 11 बजे बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। यह बदलाव नीतीश कुमार के इस्तीफे और भाजपा के नेतृत्व में एक नए शक्ति संतुलन के बाद आया है। शपथ ग्रहण समारोह से पहले सम्राट चौधरी ने पटना के पंचरूपी हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की। नई कैबिनेट में जेडीयू (JDU) कोटे से विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। भाजपा ने इस बदलाव को बिहार में ‘स्थिरता और विकास’ का नया युग बताया है।
कहां बैठे राजनीतिक समीकरण
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार भाजपा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि वे पिछले 22 महीनों से भगवा साफ़ा बांधकर नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने का संकल्प लिए हुए थे। नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य में जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। जेडीयू और भाजपा का गठबंधन अब आगामी चुनावों की तैयारी में जुटेगा, जहाँ सम्राट चौधरी का नेतृत्व पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
विपक्षी दलों, विशेषकर राजद (RJD) ने इस सत्ता परिवर्तन को “जनादेश का अपमान” और “अवसरवादिता की राजनीति” करार दिया है। आलोचकों का तर्क है कि बार-बार गठबंधन बदलने से बिहार के विकास की गति धीमी हुई है और प्रशासन में अस्थिरता पैदा हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य की कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करना और सहयोगी दल जेडीयू के साथ तालमेल बिठाकर चलना होगा, जो ऐतिहासिक रूप से जटिल रहा है।
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