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उत्तराखंड: अस्पताल में नवजात की मौत के बाद मां ने भी तोड़ा दम, डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप

रुद्रपुर जिला अस्पताल में बीते दिन प्रसव के दौरान नवजात की मौत के बाद रेफर की गई महिला की भी हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल में मौत हो गई.

रुद्रपुर जिला अस्पताल में बीते दिन प्रसव के दौरान नवजात की मौत के बाद रेफर की गई महिला की भी हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल में मौत हो गई. जिसके बाद परिजनों ने रुद्रपुर जिला अस्पताल में हंगामा किया और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया. अब तक मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार को जिला अस्पताल में गदरपुर वार्ड नंबर 11 निवासी अधिवक्ता नगमा पत्नी फईम को डिलीवरी के लिए लाया गया था. शनिवार देर शाम ऑपरेशन से नगमा ने एक नवजात को जन्म दिया था. इसके बाद डॉक्टरों ने नवजात का मृत घोषित कर दिया था. नवजात के हाथ, आंख और गले में ब्लेड के कट के निशान मिलने पर परिजनों ने जिला अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया था. परिजनों का आरोप था कि डॉक्टर ने नगमा के ऑपरेशन में लापरवाही बरती है. उन्होंने डॉक्टर के नशे में होने का भी आरोप लगाया था. हालांकि पुलिस ने एल्कोमीटर से डॉक्टर का परीक्षण किया तो उनके शराब पीने की पुष्टि नहीं हुई थी. उधर नगमा की हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे एसटीएच हल्द्वानी रेफर कर दिया था. रविवार को पुलिस ने वीडियोग्राफी के बीच नवजात के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया.

दोपहर बाद सूचना आई कि नगमा ने एसटीएच में दम तोड़ दिया है. इसके बाद परिजनों का गुस्सा बढ़ गया. नगमा की मौत के बाद परिजनों के जिला अस्पताल आने का अंदेशा था. इसको लेकर एहतियातन पंतनगर और दिनेशपुर थाने की पुलिस को जिला अस्पताल के बाहर तैनात कर दिया गया. करीब एक घंटे से अधिक समय तक पुलिस वहां मौजूद रही. सीओ तपेश चंद्र ने बताया कि मृतका के परिजन हल्द्वानी चले गए हैं और वह जिला अस्पताल नहीं आएंगे. काफी देर तक परिजन नहीं आए तो पुलिस को अस्पताल से हटा दिया गया सीएमओ डॉ. सुनीता चुफाल रतूड़ी ने बताया कि नगमा के गर्भाशय के नजदीक गांठ हो गई थी. उनका कहना है कि गर्भ में जब बच्चा आ जाता है तो अल्ट्रासाउंड में गांठ नहीं दिखती है. इसी कारण नगमा की ब्लीडिंग शुरू हो गई थी. उन्होंने बताया कि हल्द्वानी में भी करीब चार यूनिट खून चढ़ाया गया. इसके बावजूद उसकी ब्लीडिंग बंद नहीं हुई. नगमा ने जिस शिशु को जन्म दिया उसके शरीर में तीन जगह पर ब्लेड के कट के निशान मिले हैं. उन कटों से लगातार खून भी बह रहा था. अब सवाल उठ रहा है कि नवजात के शरीर पर कट के निशान कैसे आए. इस मामले जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरके सिन्हा ने बताया कि गर्भाशय में गांठ होने के कारण शिशु को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है और इसी वजह से उसके शरीर में कट के निशान आ गए.

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