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आर्चरी: शंघाई में दक्षिण कोरिया को हराकर भारत ने जीता स्वर्ण

दीपिका कुमारी की लीड में अंकिता भक्त और 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड ने दिखाया दम; 3 साल बाद रिकर्व टीम को मिली वैश्विक सफलता

शंघाई (चीन): भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने विश्व कप स्टेज 2 में इतिहास रचते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में दीपिका कुमारी, अंकिता भक्त और कुमकुम मोहोड की तिकड़ी ने मेजबान चीन को एक कड़े ‘शूट-ऑफ’ में 5-4 से पराजित किया। यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में 10 बार की ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया को हराकर सबको चौंका दिया था।

मैच के दौरान दीपिका कुमारी ने अपनी अनुभव का परिचय देते हुए निर्णायक मौकों पर ‘परफेक्ट 10’ लगाकर टीम का मनोबल बढ़ाया। 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड ने अपने पहले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में जिस परिपक्वता के साथ निशाना साधा, उसने भविष्य के लिए बड़ी उम्मीदें जगाई हैं। बिना किसी पूर्णकालिक राष्ट्रीय कोच के यात्रा कर रही इस टीम का नेतृत्व स्वयं दीपिका ने किया, जो एक ‘लीडर’ के रूप में उनकी नई भूमिका को दर्शाता है।

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जबकि यह जीत जश्न का विषय है, लेकिन भारतीय तीरंदाजी में ‘कोचिंग विवाद’ और प्रशासनिक अस्थिरता ने अभी भी देश में इस खेल का भविष्य असमंजस में रखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि खिलाड़ियों को बिना कोच के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भेजना जोखिम भरा है। आलोचकों का तर्क है कि अगर भारत को पेरिस ओलंपिक 2026 में पदक जीतना है, तो महासंघ को व्यक्तिगत प्रतिभाओं के भरोसे रहने के बजाय एक स्थिर तकनीकी स्टाफ और दीर्घकालिक योजना सुनिश्चित करनी होगी।

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