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सुरों की अनमोल विरासत: गायिका आशा भोंसले का 92 वर्ष की आयु में निधन

मुंबई | 13 अप्रैल, 2026

भारतीय संगीत जगत के लिए आज का दिन एक अपूरणीय क्षति का दिन है। सात दशकों तक अपनी जादुई आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोंसले का 92 वर्ष की आयु में मुंबई के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, उन्होंने उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते कल देर शाम अंतिम सांस ली।

उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मनोरंजन जगत की दिग्गज हस्तियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

सुरों का सफर

आशा भोंसले का जन्म 8 सितंबर, 1933 को सांगली (महाराष्ट्र) के एक संगीत प्रधान परिवार में हुआ था। पंडित दीनानाथ मंगेशकर की पुत्री और स्वर कोकिला लता मंगेशकर की अनुज अनुजा के रूप में, संगीत उनके रक्त में था। उन्होंने 1943 में अपनी पहली फिल्म ‘माझा बाळ’ से गायन की शुरुआत की और तब से कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उनकी आवाज की सबसे बड़ी विशेषता उनकी विविधता (Versatility) थी। उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लेकर ग़ज़ल, पॉप, कैबरे और भक्ति गीतों तक, हर शैली को अपनी विशिष्ट पहचान दी। 12,000 से अधिक गीतों को अपनी आवाज देने वाली आशा जी का नाम ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में सबसे अधिक रिकॉर्ड किए गए कलाकार के रूप में दर्ज है।

राजकीय सम्मान के साथ विदाई

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महाराष्ट्र सरकार ने दिग्गज गायिका के सम्मान में राज्य में एक दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है। आज दोपहर उनकी पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए उनके दक्षिण मुंबई स्थित आवास पर रखा गया है, जहाँ फिल्मी सितारों से लेकर आम प्रशंसक अपनी ‘आशा ताई’ को विदाई देने पहुँच रहे हैं।

शाम 4:00 बजे मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रशासन ने सुरक्षा और भारी भीड़ को देखते हुए यातायात के विशेष प्रबंध किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

सहनशीलता और जीवटता की प्रतिमूर्ति

आशा भोंसले का जीवन केवल संगीत तक सीमित नहीं था; वे अपनी जीवटता और संघर्ष के लिए भी जानी जाती थीं। निजी जीवन की चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने हमेशा अपने चेहरे पर मुस्कान और आवाज में ऊर्जा बनाए रखी। उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार (2000) और पद्म विभूषण (2008) सहित अनगिनत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया।

संगीत समीक्षकों का मानना है कि आशा जी ने भारतीय पार्श्व गायन को एक नया आयाम दिया। ओ.पी. नैय्यर, आर.डी. बर्मन और खय्याम जैसे संगीतकारों के साथ उनके सहयोग ने हिंदी सिनेमा को ऐसे कालजयी गीत दिए जो युगों-युगों तक संगीत प्रेमियों के कानों में रस घोलते रहेंगे।

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