कछार, असम: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज असम के कछार जिले में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा का दौरा कर रहे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य सीमा सुरक्षा की समीक्षा करना और ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II’ की शुरुआत करना है।
अमित शाह ने सीमावर्ती गांवों के विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि सरकार इन इलाकों में बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि पलायन रुके। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध घुसपैठ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और तकनीकी निगरानी (Smart Fencing) को और कड़ा किया जाएगा। इसके साथ ही, असम में आगामी चुनावों के मद्देनजर उनके इस दौरे को राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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आलोचना और राजनीतिक रुख:
- चुनावी आरोप: असम में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए विपक्ष ने इस दौरे को शुद्ध रूप से “चुनावी ध्रुवीकरण” की कोशिश बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा घुसपैठ के मुद्दे को केवल चुनावों के दौरान हवा देती है।
- डेमोग्राफी विवाद: शाह ने कांग्रेस पर “वोट बैंक की राजनीति के लिए सीमाएं खुली छोड़ने” का आरोप लगाया, जिस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा पिछले 10 साल से सत्ता में है और अपनी विफलताओं का ठीकरा पुराने शासन पर फोड़ रही है।
- स्थानीय मुद्दे: स्थानीय संगठनों का तर्क है कि सीमा पर ‘स्मार्ट फेंसिंग’ के वादे अभी भी कई हिस्सों में अधूरे हैं और ‘वाइब्रेंट विलेज’ का लाभ वास्तविक निवासियों तक पहुँचने में प्रशासनिक देरी एक बड़ी बाधा है।
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