नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के समापन पर ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’ जारी किया गया। इसमें 70 से अधिक देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग पर सहमति जताई है। समिट के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी ने अगले 7 वर्षों में एआई क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की, जिसका लक्ष्य भारत को वैश्विक एआई हब बनाना है।
आलोचना और विवाद: जहाँ सरकार इसे ‘डिजिटल संप्रभुता’ की जीत बता रही है, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने इस आयोजन को “पब्लिसिटी स्टंट” करार दिया है।
- प्रदर्शन: भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं ने आयोजन स्थल के बाहर ‘शर्टलेस’ प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सरकार अमेरिका के साथ हुई हालिया ट्रेड डील में राष्ट्रीय हितों और डेटा सुरक्षा से समझौता कर रही है।
- विपक्ष का तर्क: कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव की आलोचना करते हुए समिट को “सस्ता चाइना बाज़ार” बताया और आरोप लगाया कि यह तकनीकी नवाचार से अधिक विज्ञापन पर केंद्रित है।
- निष्पक्ष दृष्टिकोण: विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश की घोषणाएं उत्साहजनक हैं, लेकिन डेटा गोपनीयता (Data Privacy) और एआई के कारण होने वाले संभावित रोजगार नुकसान पर सरकार की ओर से अभी भी ठोस नीतिगत स्पष्टता की कमी है।
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इस समिट ने न केवल तकनीक पर चर्चा की, बल्कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लगभग $250 बिलियन के निवेश की प्रतिबद्धताएं भी हासिल की हैं। प्रधानमंत्री मोदी के ‘AI for All’ के विजन को वैश्विक मंच पर सराहा गया है। हालांकि, समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा ‘यूएस ट्रेड डील’ के विरोध में किए गए प्रदर्शन ने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। भाजपा ने इसे ‘विकास विरोधी’ करार दिया है।
















