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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर किसानों का विरोध तेज

बीकेयू (टिकैत गुट) ने दी आंदोलन की चेतावनी; सरकार पर 'खेती के हितों से समझौते' का आरोप।

भारत और अमेरिका के बीच अंतिम रूप दिए जा रहे व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इस समझौते को भारतीय किसानों के लिए ‘आत्मघाती’ बताया है। मुजफ्फरनगर के सिसौली में आयोजित एक बैठक में खाप पंचायतों ने आशंका जताई है कि इस समझौते के बाद अमेरिकी कृषि उत्पाद, विशेष रूप से गेहूं और डेयरी उत्पाद भारतीय बाजार में कम कीमतों पर बिकेंगे, जिससे स्थानीय किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा।

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दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने इस समझौते का बचाव किया है। सरकार का तर्क है कि भारतीय किसान गुणवत्ता के मामले में किसी से पीछे नहीं हैं और यह समझौता बासमती चावल जैसे भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार के रास्ते खोलेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू सुरक्षा (Safety Nets) को ध्यान में रखकर ही शर्तें तय की जा रही हैं।

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विपक्ष और किसान संगठनों का आरोप है कि सरकार ने पिछले कृषि कानूनों पर जो ‘U-टर्न’ लिया था, उसके बाद किसानों का भरोसा डगमगाया हुआ है। आलोचकों का तर्क है कि अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है, जिसकी बराबरी भारतीय किसान नहीं कर सकते। निष्पक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सरकार इस समझौते की पारदर्शिता और किसानों के लिए न्यूनतम मूल्य (MSP) की गारंटी सुनिश्चित नहीं करती, तब तक जमीनी स्तर पर विरोध थमना मुश्किल है।

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